तीन साल का कार्यकाल
मनमोहन सिंह ने अपने तीन साल के कार्यकाल में किये गए कार्यो की रिपोर्ट देश के सामने पेश कर दी ही
हैं । इस रिपोर्ट को आप गूगल पर सर्च कर देख भी सकते हैं .तीन सालो का कार्यकाल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और इस सरकार के लिए काफी मुश्किल भरा सफ़र रहा हैं । फिर भी रिपोर्ट में कांग्रेस ने अपने 3 साल की उपलब्धियों को गिनाया हैं। अच्छी बात तो ये हैं सरकार ने ये बात मानी हैं 2g स्पेक्ट्म जैसे घोटाले बढ़ती महंगाई ओर विकास दर में कमी जैसे दिकतो का सामना करना पड़ा इससे सरकार की छवि भी ख़राब हुई।
कांग्रेस और उसके गटबंधन वाली सरकार देश में दूसरी दफे राज्य कर रही हैं , इस से पहले भी इसी गटबंधन वाली सरकार (UPA -1) ने देश को चलाया था । दो दिन पहले अंग्रेजी अख़बार ने वर्तमान
सरकार (UPA -2) की तुलना UPA -1 से की .।5 सालो के UPA -1 के कार्यकाल में मंहगाई दर 25.6 % थी अब वर्तमान में वो बढ़कर 28 % हो गयी हैं। विकास दर कमी और रूपये का कमजोर होना। ये सभी चीज़े वर्तमान सरकार (UPA -2) के सिर्फ तीन सालो के कार्यकाल में दिख गयी ।
सबसे बड़ी समस्या जो उभर कर आ रही हैं वो हैं मुद्रा सिथ्ती का डामाडोल होना .रूपया का हर दिन ओंधे मुँह गिरना देश के अर्थयवस्था के लिए कोई शुभ संकेत नहीं हैं ,प्रणब मुख़र्जी ने इसे यूरो जोन संकट बता कर इस आर्थिक समस्या को सुलझाने की कोशिश की हैं
और कहा हैं सरकार इस समस्या का हल खोजने के लिए कठोर निर्णय ले गी .और लिया भी
सरकारी खर्च पर कटोती लेकिन ये कटोती उन मंत्रियो के लिए नहीं जो 5 सितारा होटलों में सेमिनार करते हैं।और सरकारी खजानों पर विदेश यात्रा करते हैं ।ऐसे में बता दूँ ऐसे ही फैसलों ने फ्रांस और ग्रीस में लोगो को सड़क में उतरने में मजबूर किया था ।
दूसरी एक और समस्या हैं विदेशी निवेशको की दूरी ।रूपये के गिरावट के लिए इसे सबसे बड़ा कारण माना जा सकता हैं इसलिए RBI ने विदेश में रहने वाले भारतीयों से कहा वो अपने कमाई का कुछ हिस्सा भारत में निवेश करे जिससे की मुद्रस्थिथि में कुछ सुधार हो सके ।
तेलेनोर जैसे विदेश कंपनी यो का पजीकरण रद कर दिया गया उस बात इस स्वित्ज़रलैंड की कंपनी ने भारत से निवेश हटाने का मन बना लिया हैं।आज जब सारा विश्व आर्थिक संकट से गुजर रहा हैं और इससे भारत भी अब अछुता नहीं हैं ।इस सरकार की सबसे बड़ी समस्या उसके सामने हैं देश को आर्थिक मजबूती देना ।
दो साल बाद चुनाव हैं पहले भी हो सकते हैं ऐसे में मनमोहन सिंह जानते हैं लोकतंत्र की सबसे बड़ी खासियत हैं 3 साल का हिसाब देने पर भी जनता जवाब 5 साल बाद ही देगी । और इस समय जवाब नकरात्मक हि लग रहे हैं ...
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